एक माह में दूसरी बार चली गोलियां**पहली बार चली 4 गोलिया युवक हुआ गम्भीर घायल,**आज फिर चली गोलिया एक गरीब असहाय युवक की मौत*

एक माह में दूसरी बार चली गोलियां**पहली बार चली 4 गोलिया युवक हुआ गम्भीर घायल,**आज फिर चली गोलिया एक गरीब असहाय युवक की मौत*

*एक माह में दूसरी बार चली गोलियां*
*पहली बार चली 4 गोलिया युवक हुआ गम्भीर घायल,*
*आज फिर चली गोलिया एक गरीब असहाय युवक की मौत*

बालोतरा। शहर में अब सब कुछ ठीक नही हो रहा है, दिनदहाड़े गोली मारना शहर के लिए बेहद दुःखद बात है,  यह शहर एक समय शांत था, पर आज इस शहर में भय का माहौल है,शहर में बेख़ौफ़ होकर दागी जा रही गोलियां, हर कोई है भयभीत, कहा गया सारा सिस्टम, कहा गया खाकी का डर, जहाँ अपराधियो में भय होना चाइये वे आखिर भय मुक्त कैसे, आज के हुए घटनाक्रम से हर कोई पूछ रहा सवाल, सिस्टम को क्या हो गया, कब कौन किसको मौत के घाट उतार दे, कब कौन किसका शिकार हो जाये,  है! भगवान एक तरफ़ इस शहर में कोरोना से आमजन भयभीत,वही दूसरी ओर ये खूनी खेल,जिला प्रशासन बालोतरा में क्या हो रहा है, सब कुछ हो रहे इस खेल के बारे में क्यो अनभिज्ञ हो पूरा का पूरा सिस्टम। कुछ करो आतंक सिर चढ़ कर बोल रहा है। शहर में स्मेक का कारोबार धड़ल्ले से चल रहा है जिसका कोई तोड़ नही निकाल रही है स्थानीय पुलिस प्रशासन, आखिर कितनी जिंदगियों को इसी तरह मौत के घाट उतार दिया जाएगा।
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